इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व मंत्री और इमरान खान के करीबी रहे फवाद चौधरी ने देश की सत्ता व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस बात पर 'कोई दो राय नहीं' है कि पाकिस्तान के वास्तविक नेता सेना प्रमुख आसिम मुनीर हैं और मौजूदा समय में असली निर्णय लेने की शक्ति सेना के हाथों में है। ANI से बातचीत में फवाद चौधरी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में आसिम मुनीर को पाकिस्तान का नेता कहा, और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का जिक्र तक नहीं किया। उनके अनुसार यह साफ संकेत है कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना में सेना की भूमिका सबसे प्रमुख है।
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'ट्रंप ने आसिम मुनीर को पाकिस्तान का नेता कहा'
फवाद चौधरी ने कहा, 'इस बात पर कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान के असली और वास्तविक नेता सेना प्रमुख आसिम मुनीर हैं। मौजूदा समय में देश के फैसले लेने की शक्ति पूरी तरह सेना प्रमुख के हाथों में है। अगर आप देखें तो कल ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर को पाकिस्तान का नेता कहा और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम तक नहीं लिया। इससे यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान का वास्तविक नेतृत्व सेना प्रमुख के पास है।'
'पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है'
फवाद चौधरी ने यह भी बताया कि हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए बातचीत हुई थी, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का आर्थिक असर पाकिस्तान पर कहीं ज्यादा पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार सीमित हैं, जिससे महंगे आयात करना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों पर सीधा असर डाला है।
'सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान जैसे देशों पर पड़ा है'
पूर्व मंत्री ने कहा, 'युद्ध खत्म होना चाहिए और हालात सामान्य होने चाहिए। पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बहुत ज्यादा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव है और देश महंगे दामों पर दुनिया से चीजें नहीं खरीद सकता। तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे मध्यम वर्ग पहले से ज्यादा प्रभावित हो रहा है और हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। वैश्विक संघर्षों का असर सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है, जिससे उर्वरक और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान जैसे देशों पर पड़ा है।'